एकता नीलम
के.जी.बी.वी – वार्डन शाहगंज
भारत एक प्रजातंत्र देश है। इस देश में स्त्रियों और पुरषों को समान अधिकार प्राप्त है लेकिन नारी को स्वतंत्रता से जीनें का अधिकार नहीं है। हर कदम पर स्त्री को पुरुष का सानिध्य अनिवार्य है। आज का समाज जागरूक है बेटी और बेटे में कोई फर्क नहीं समझता है।फिर भी लोगो को बेटी से ज्यादा बेटो की ख्वाहिश रहती है इसके लिए लोग लिंग परिक्षण कराकर माँ की गर्भ में ही बेटी को ख़त्म कर देते हैं। इसके पीछे महिलाओं की अपेछा पुरुष अधिक दोषी हैं। यानी लोग नहीं चाहते है हमारे घर लड़कियां पैदा हो। यदि किसी के घर लड़की पैदा हो भी जाती है तो अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है इसके पीछे हमारे समाज का दूषित वातावरण अधिक जिम्मेदार है। जरा सी असावधानी होने पर कितनी बड़ी अनहोनी हो सकती है। इसका अन्दाजा दिल्ली की घटना से लगाया जा सकता है और घटनाएँ आम है। अगर सरकार इन घटनाएँ रोकने में अक्षम है तो सारे नियम कानून समीक्षा होनी चाहिए और सरकार से अनुरोध है कि नियम कानून को सख्ती से पालन कराए। जहाँ इस प्रकार के दुष्कर्म समाज में पनप रहें है जैसे जगह जगह पोस्टर लगे होते है ठंडी बियर और देशी शराब की दूकान एस्से तत्काल बंद कर देनी चाहिए क्योंकि ऐसे पाशवि कृत्य कोई सामान्य स्तिथि में नहीकर सकती।
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