
कंचन लता द्विवेदी
कक्षा 4, अध्यापक,

कंचन लता द्विवेदी
कक्षा 4, अध्यापक,
समस्त स्टाफ
कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विघालय
मडियाहूँ , जौनपुर
” मुझे इन चिरागों से डर लग रहा है
“नारी माता ,बहन ,पत्नी और प्रिया बन जाती
फिर भी उसे नारी होने की कीमत चुकानी पड़ती
उसे प्रभु से ये सर्वदा शिकायत रहती ,
शरीर ऐसा क्यों दिया , क्यों वह बेबस सी ही रहती
सदियों से यह क्यों चलता रहा , आँचल में है दूध ,आँखों में है पानी
हम ही दुर्गा है और हम ही काली माँ
फिर भी हरण किया जाता , हमरे चीर का
अपने बेबस शरीर को बनाना होगा लोहे का
और तभी पूरा होगा सपना भारत माता का ”
राशमी
कस्तूरबा गाँधी बालिका विघालय
महराजगंज , जौनपुर
“औरत ने आदमी को जन्म दिया
आदमी ने उसे बाजार दिया
जब चाहा उसे मसला – कुचला
जब चाह उसे दुतकार दिया”
वही आदमी उस औरत का तिरस्कार करता है और वह सहती रहती है । वह नही अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार पर आवाज नही उठाती है क्या हम औरतो की मानसिकता ऐसी बन गयी है, क्या हम अपने आप को बेबस और लाचार समझती है और कई बार ऐसा होता है की औरते समाज व् लोक लाज के डर से अपनी आवाज नही उठाती है , और वह इस हिंसा की शिकार होती है जो की बहुत गलत बात है ।
घरेलू हिंसा कई तरह के हो सकते है
1- औरत के अपने अधिकारों हा हनन होना .
2- गाली – गलोज देना औरत को
3- औरतो के साथ मारपीट करना
4- औरतो को घर से बाहर आने जाने पर रोक लगाना
5- उन्हें पैसे न देना आदि ।
इस हिंसा के कारण –
1- आदमी को नशे की लत होना
2- गरीबी ।
हमारे समाज में इसके विरुद्ध कई कानून बनाए गये है । इसके अंतर्गत पीड़ित को सरकार की तरह से सुरक्षा मुहैय्या करायी गई है । पीड़ित इस अत्याचार के खिलाफ चिहे तो ‘498 ए ‘ के तहत पुलिस केस भी कर सकते है । इसलिए हम औरतो को चाहिए की इसके विरुद्ध आवाज उठाए और अपने ऊपर होने वाले अत्याचार से मुक्ति पाये तथा पुरषों को भी चाहिये की वह महिलाओ का सम्मान करे और उन्हें वह ऊँचा दर्जा दे , जिनकी वह अधिकारी है ।
” नारी निंदा मत करो , नारी नर की खाल
नारी से ही होता है , ध्रुव प्रहलाद समान ”
Collective Creation
के.जी.बी.वी. बदलापुर जौनपुर
समाज में रहने वाले ऐसे दरिंदो को सुधारने के लिए हम लड़कियों का यही विचार है कि उन्हें फाँसी की सजा देना बहुत कम है बल्कि ऐसे दरिंदो को नपुंसक बना उसके हाथ पैर काट किया जाये तथा एक आँख निकाल देना चाहिए ऐसी सजा देनी चाहिए जैसे एक लड़की जिन्दगी भर इस घटना से दुखी हो मर मर के जीती है उसी प्रकार उसके साथ ऐसा दुराचार करने वाला भी जिन्दगी भर घुट घुट कर जिएँ तथा उसे अपने गलती का एहसास हर पल हर पग पर होता रहे । उसे देखने से ऐसी बुरी मानसिकता वाले व्यक्ति भी ऐसा करने से डरे ।
इस प्रकार की सजा देने से सिर्फ समाज में ही नही बल्कि लोगो के दिलों में डर समा जायेगा तथा लोग ऐसे गलत कार्य करने से डरेंगें । तथा हम लड़कियों का यही विचार है कि हमें इतना ताकतवर बनाया जाये जिससे ऐसी दुर्घटना घटने पर हमें हिम्मत से सामना कर विजय हासिल कर सके।
राशमी
कस्तूरबा गाँधी बालिका विघालय महाराजगंज , जौनपुर
” नारी जीवन हाय , तेरी यही कहानी
आँचल में दूध , और आँखों में पानी ”
सर्वप्रथम इस घिनोने कार्य पर रोक लगे तथा इसके लिए सरकार और भी कठोर कदम उठाए । हमारे यहाँ बलात्कार के दोषी की सजा 7 वर्ष की कैद है , जो की कम है । इसके लिए और कठोर – कानून बनिए जाये । यौन – उत्पीडन के विषय को कक्षा की पाठ्य – पुस्तक में शामिल किया जाये , जिससे बच्चियाँ इस विषय पर जागरुक बने । लडकियों को स्कूल में आत्मरक्षा के तरीको के बारे में बताने के लिए विशेष ट्रेनरो की नियुक्ति हर ब्लोक स्तर पर की जाये ।
हमारे यहाँ बालिंग होने की उम्र को 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष की जाये , जिससे उस छठवे दरिंदो को भी कड़ी सजा मिल सके ।
ऐसे मामले फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट में जाये , जिससे इनका निपटारा जल्द हो सके । हर तहसील में कम से कम एक महिला थाना की स्थापना होनी चाहिए । परिवारजनों को शुरुआत से ही बच्चो को इस बात की सीख देनी चाहिए की दूसरो के घर की लडकियों को अपने घर की लडकियों की तरह ही समझे । उनका सम्मान करे तथा उन्हें अपने बराबर ही मने । बसों पर काले शीशे प्रतिबंधित हो । फिल्मे समाज का आइना होती है । अंत अश्लील फिल्मो पर रोक लगे । जगह – जगह चेक – पोस्ट बनाकर पुलिसे द्वारा वाहनों की तलाशी ली जाये । इन कठोर कदमो को उठाकर ही हम और हमारा समाज इस समस्या से निपट सकते है तथा इस दिशा में एक सकारात्मक बदलाव ल सकता है ।


Sunita Singh
Virangana (Activist Group, Prerna Girls School)
भेद- भाव मिटाना है तो दिल से जुट जाओ।
लड़की- लड़का बराबर है, कह- कह के न छुपाओ ।
गर्भ में बेटी है तो, उसको न मिटाओ ।
आने दो संसार में और हौसला बढाओ।
बेटे को इंजिनियर तो, बेटी को डॉक्टर बनाओ ।
दोनों में भेद करके नाक न कटाओ ।
बुढ़ापे की लाठी सोच कर, सर पर न बैठाओ ।
बन सकता है, एक अच्छा इन्सान राक्षस न बनाओ ।
माँ- बाप हो , कर्तव्य भी बताओ ।
भेद – भाव को दिल से , जड़ तक मिटाओ ।।

Sunita Singh
Virangana (Activist Group, Prerna Girls School)
इस सुंदर सृष्टि में न कोई जहान था ।
धरती से अम्बर तक सभी जगह वीरान था ।
ईश्वर का खिलौना , कठपुतली इन्सान था ।
खेल -खेल में हुई गलती , बुद्धि दिया अपार था ।
बुद्धि पाकर भला मानुष , बना एक शैतान है ।
धरती बाटी, सागर बाटा ऐसा तो बेईमान है ।
हिन्दु , मुस्लिम , सिख , इसाई ।
सब थे एक दिन भाई- भाई ।
एक हृदय के चार टुकड़े को
देख हँसता एक हैवान है ।
ईश्वर के आँखों में नमी, कोसता भी ईमान है ।
खंड किया हर चीज़ों को ऐसा तो इन्सान है ।